यह मार्गदर्शिका किसके लिए है
यह मार्गदर्शिका हिंदी में शोधपत्र लिखने वाले शोधार्थियों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, अध्यापकों और अनुवादित पांडुलिपि तैयार करने वाले लेखकों के लिए है। विशेष रूप से तब उपयोगी है जब विषय की समझ मजबूत हो, लेकिन भाषा अत्यधिक औपचारिक या अंग्रेज़ी वाक्यरचना से प्रभावित लगे।
पहले अनुच्छेद का काम पहचानें, फिर भाषा बदलें
हर हिस्से पर एक जैसी संपादन शैली लागू न करें। सार में उद्देश्य, पद्धति, प्रमुख परिणाम और सीमित निष्कर्ष स्पष्ट होने चाहिए। भूमिका में समस्या और शोध-अंतर स्थापित करें; साहित्य समीक्षा को केवल अध्ययनों की सूची न बनाएं। पद्धति में पठनीयता से अधिक जरूरी है कि दूसरा शोधकर्ता प्रक्रिया समझ सके। परिणाम में अवलोकन प्रस्तुत करें, जबकि चर्चा में उनकी व्याख्या और सीमाएं बताएं।
मसलन, ‘अध्ययन का संचालन किया गया था’ को ‘अध्ययन किया गया’ करना उपयोगी है, लेकिन ‘प्रतिभागियों का चयन किया गया’ से चयन-विधि गायब नहीं होनी चाहिए। यादृच्छिक चयन और सुविधा-आधारित नमूना अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी अस्पष्ट वाक्य को सहज बनाने से पहले लेखक के नोट, प्रश्नावली या प्रयोग-विवरण से अर्थ की पुष्टि करें। अनुपस्थित जानकारी का अनुमान लगाकर वाक्य पूरा न करें।
हिंदी शब्दावली सहज रखें, शोध का अर्थ अपरिवर्तित
प्रचलित और सटीक हिंदी शब्द चुनें; केवल गंभीर दिखने के लिए दुर्लभ पर्याय न जोड़ें। पहली बार किसी तकनीकी पद के साथ उसका मूल पद या संक्षेप दिया जा सकता है, यदि लक्षित पत्रिका इसकी अनुमति देती हो। इसके बाद एक ही अवधारणा के लिए एक ही शब्द रखें। ‘वैधता’ और ‘विश्वसनीयता’ को शैलीगत विविधता के लिए आपस में बदलना गलत होगा।
शब्दावली की छोटी सूची बनाएं और पूरे शोधपत्र में उससे मिलान करें। प्रतिशत, इकाई, दशमलव, ऋण-चिह्न और तालिका-संख्या अलग से जांचें। ‘सांख्यिकीय रूप से सार्थक नहीं’ का अर्थ ‘कोई प्रभाव नहीं’ नहीं होता। इसी तरह सहसंबंध को कारण बताना भाषा-सुधार नहीं, निष्कर्ष बदलना है। ‘सुझाव देता है’ को ‘सिद्ध करता है’ तभी बदलें जब शोध-रचना और साक्ष्य वास्तव में उस दावे का समर्थन करते हों।
संशोधन के बाद स्रोत, मौलिकता और नीति की जांच
संपादन से पहले मूल मसौदा सुरक्षित रखें। फिर छोटे खंड पर निर्देश दें: भाषा स्पष्ट करें, पर आंकड़े, उद्धरण, संदर्भ-संकेत और दावे की सीमा न बदलें। संशोधित पाठ की मूल से तुलना करें और प्रत्येक बदलाव स्वीकार करने से पहले उसका औचित्य देखें। किसी वाक्य को बांटने पर उसका संदर्भ उसी दावे के साथ रहना चाहिए जिसे स्रोत समर्थन देता है।
सीधे उद्धरण के भीतर भाषा न सुधारें। परोक्ष कथन की पुष्टि मूल स्रोत से करें और लेखक, वर्ष, पृष्ठ तथा संदर्भ-सूची की संगति जांचें। अप्रमाणित संदर्भ जोड़कर रिक्त स्थान न भरें। शोध आपका मौलिक कार्य होना चाहिए; भाषा-सहायता उसका विकल्प नहीं है। संस्थान, पर्यवेक्षक और पत्रिका की कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी नीति पढ़ें। जहां घोषणा आवश्यक हो, इस्तेमाल किए गए साधन और सहायता का दायरा बताएं; निषिद्ध उपयोग छिपाने के लिए पुनर्लेखन न करें।